स्वतंत्र छत्तीसगढ़ डेस्क

हाइलाइट बॉक्स:

अखबार

  • संसद का 3 दिवसीय विशेष सत्र आज से शुरू
  • मोदी सरकार पेश करेगी 3 अहम विधेयक
  • महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में बड़ा कदम
  • लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने का प्रस्ताव
  • सरकार और विपक्ष के बीच तीखी टकराव की स्थिति

विशेष सत्र की शुरुआत और राजनीतिक माहौल

देश की राजनीति के लिए आज का दिन बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि संसद का विशेष सत्र शुरू हो चुका है। इस तीन दिवसीय सत्र में केंद्र सरकार तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जिन पर पूरे देश की नजर टिकी हुई है। सत्र की शुरुआत के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और टकराव की स्थिति बनती दिख रही है, जिससे आने वाले दिनों में संसद का माहौल काफी गरम रहने की संभावना है।

किन नेताओं की भूमिका रहेगी अहम

इस विशेष सत्र में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। जहां अमित शाह एक प्रमुख विधेयक पेश करेंगे, वहीं अर्जुन राम मेघवाल दो अन्य विधेयकों को सदन में प्रस्तुत करेंगे। इन विधेयकों को लेकर सरकार पूरी तैयारी के साथ उतरी है और इन्हें पारित कराने की रणनीति भी तैयार कर चुकी है।

कौन-कौन से विधेयक होंगे पेश

सरकार जिन तीन विधेयकों को पेश करने जा रही है, उनमें केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026 और परिसीमन विधेयक 2026 शामिल हैं। इन विधेयकों के जरिए दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने, बढ़ती जनसंख्या के अनुसार संसद में सीटों की संख्या बढ़ाने और लोकसभा-विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का रास्ता साफ करने का प्रयास किया जा रहा है।

महिला आरक्षण और 2029 चुनाव पर प्रभाव

इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को पूरी तरह लागू करना है। यदि महिला आरक्षण से जुड़ा प्रावधान पास हो जाता है, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। महिलाओं की  राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने के इस प्रयास को सरकार एक ऐतिहासिक कदम के रूप में पेश कर रही है, जो देश की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है।

विपक्ष का रुख और आगे की रणनीति

वहीं विपक्ष इस पूरे मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार के प्रस्तावित संशोधन को सत्ता केंद्रीकरण की कोशिश बताया है, हालांकि उन्होंने महिला आरक्षण का समर्थन भी किया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि संसद में जब ये बिल पेश होंगे, तब विपक्ष किस रणनीति के साथ सरकार का सामना करेगा और क्या ये विधेयक आसानी से पारित हो पाएंगे या नहीं।