बेसन वाली कढ़ी से क्यों बेहतर है मूंग दाल की कढ़ी?
मूंग दाल की कढ़ी न सिर्फ स्वाद में पारंपरिक बेसन वाली कढ़ी से एकदम अलग और टेस्टी होती है, बल्कि यह आपकी सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है। अक्सर देखा जाता है कि बेसन से बनी कढ़ी खाने के बाद कई लोगों को पेट में भारीपन, गैस या अपच की समस्या होने लगती है। इसके विपरीत, मूंग दाल पचने में बहुत हल्की होती है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है। यही वजह है कि यह स्वाद और सेहत का एक बेहतरीन ‘कॉम्बो’ मानी जाती है।
मूंग दाल की कढ़ी बनाने की आसान विधि
इस खास कढ़ी को बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की जरूरत नहीं है। आप इसे घर में मौजूद बुनियादी चीजों से आसानी से तैयार कर सकते हैं:
- दाल भिगोना: सबसे पहले एक कप बिना छिलके वाली मूंग दाल को धोकर 2 से 3 घंटे के लिए पानी में भिगो दें। इसके बाद पानी छानकर दाल को मिक्सर में दरदरा पीस लें।
- पकौड़े तैयार करना: पिसी हुई दाल के आधे हिस्से में थोड़ा सा नमक, हींग, बारीक कटी हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाकर छोटे-छोटे पकौड़े तल लें। मूंग दाल के पकौड़े बहुत ही सॉफ्ट बनते हैं।
- कढ़ी का घोल: बचे हुए आधे दाल के पेस्ट में एक कप खट्टा दही या छाछ मिलाएं। इसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और आवश्यकतानुसार पानी डालकर एक पतला और एकसार घोल तैयार कर लें।
- उबालना और पकाना: एक कढ़ाई में थोड़ा सा तेल गरम करें। उसमें मेथी दाना, राई, जीरा और हींग का तड़का लगाएं। अब तैयार घोल को कढ़ाई में डालें और लगातार चलाते रहें जब तक कि इसमें उबाल न आ जाए। उबाल आने के बाद गैस धीमी करें और कढ़ी को 15-20 मिनट तक पकने दें।
- तड़का और सर्विंग: जब कढ़ी अच्छी तरह पक जाए, तो इसमें तैयार पकौड़े डाल दें। आखिरी में ऊपर से देसी घी, सूखी लाल मिर्च और कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर का एक कड़क तड़का लगाएं और गरमा-गरम चावल के साथ परोसें।
इस वीकेंड रसोई में करें यह नया प्रयोग
अगर आप भी हर हफ्ते एक ही तरह का खाना खाकर बोर हो चुके हैं, तो यह रेसिपी आपके मेन्यू को एक नया ट्विस्ट देगी। यह डिश न केवल आपके परिवार के स्वाद को बदलेगी बल्कि बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के पाचन तंत्र के लिए भी सुरक्षित रहेगी। तो देर किस बात की, इस वीकेंड अपनी रसोई में मूंग दाल की कढ़ी का जादू बिखेरें और तारीफें बटोरें।

