पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था व महंगाई पर असर को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ती भू-  राजनीतिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा।
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 1,312.91 अंक यानी 1.70 प्रतिशत टूटकर 76,015.28 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी50 360.30 अंक यानी 1.49 प्रतिशत गिरकर 23,815.85 के स्तर पर बंद हुआ।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार तकनीकी रूप से निफ्टी फिलहाल कमजोर नजर आ रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि 23,700 का स्तर निफ्टी के लिए तत्काल समर्थन है और इसके नीचे गिरावट और तेज हो सकती है। वहीं 24,000 के ऊपर जाने पर बाजार की धारणा में सुधार देखने को मिल सकता है।

दिनभर बाजार पर कमजोर वैश्विक संकेतों और लंबे समय तक भू-राजनीतिक तनाव बने रहने की आशंकाओं का दबाव बना रहा। निफ्टी में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में टाइटन कंपनी, इंटरग्लोब एविएशन और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शामिल रहे। वहीं दूसरी ओर कोल इंडिया, अदानी पोर्ट्स और हिंदुस्तान यूनिलीवर बढ़त दर्ज करने वाले प्रमुख शेयरों में रहे।

बाजार में व्यापक बिकवाली का असर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर भी देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 1.05 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 1.13 प्रतिशत गिरकर बंद हुए।

सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स इंडेक्स सबसे ज्यादा प्रभावित रहा और इसमें करीब 4 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी, निफ्टी PSU बैंक और निफ्टी मीडिया इंडेक्स में भी भारी गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों को आशंका है कि बढ़ते कच्चे तेल के दाम महंगाई को बढ़ा सकते हैं और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

हालांकि कुछ डिफेंसिव सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी FMCG, निफ्टी फार्मा और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में अपेक्षाकृत मजबूती देखने को मिली क्योंकि बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों ने सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया।

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