दीपावली हिंदू धर्म के सबसे प्रमुख और लोकप्रिय त्योहारों में से एक है। हर साल कार्तिक मास की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। दिवाली को अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन घरों को दीपों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाता है। साथ ही मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर दिवाली मनाने की शुरुआत कैसे हुई और इसके पीछे कौन-कौन सी धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हैं? पौराणिक कथाओं में दीपावली को लेकर कई प्रसंग मिलते हैं। इनमें तीन कथाएं सबसे अधिक प्रचलित हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।
1. भगवान श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी में जले थे दीप
दीपावली मनाने के पीछे सबसे प्रचलित मान्यता भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी से जुड़ी है। रामायण के अनुसार, भगवान राम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्षों का वनवास पूरा किया था। इस दौरान उन्होंने लंकापति रावण का वध कर बुराई का अंत किया और माता सीता को उसके चंगुल से मुक्त कराया।
वनवास पूरा होने के बाद जब भगवान श्रीराम अयोध्या लौटे, तो उनके स्वागत में नगरवासियों ने दीप जलाकर पूरे शहर को रोशन कर दिया। इसी खुशी में अयोध्या में दीपोत्सव मनाया गया था। मान्यता है कि तभी से हर साल दीप जलाकर दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है।
2. वनवास से लौटे पांडवों के स्वागत में मनाई गई दीपावली
दीपावली से जुड़ी एक अन्य पौराणिक मान्यता महाभारत काल के पांडवों से संबंधित है। कथा के अनुसार, कौरवों के साथ जुए में राज्य हारने के बाद पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास बिताना पड़ा था।
निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद जब पांडव वापस लौटे, तो उनके आगमन की खुशी में लोगों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया। इस मान्यता को भी दीपावली मनाने की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है।
3. समुद्र मंथन से हुआ था मां लक्ष्मी का प्राकट्य
दीपावली का संबंध मां लक्ष्मी के प्राकट्य से भी माना जाता है। पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन के दौरान मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। मां लक्ष्मी को धन, वैभव, सुख और समृद्धि की देवी माना जाता है।
इसी मान्यता के चलते कार्तिक अमावस्या की रात दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है। भक्त अपने घरों की साफ-सफाई कर दीपक जलाते हैं और देवी से सुख, शांति, धन-धान्य एवं समृद्धि की कामना करते हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है।
प्रकाश, सकारात्मकता और खुशहाली का प्रतीक है दिवाली
दिवाली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता लाने और बुराइयों को दूर करने का संदेश भी देता है। इस दिन लोग अपने घरों को सजाते हैं, रंगोली बनाते हैं, दीपक जलाते हैं और परिवार के साथ मिलकर पर्व की खुशियां साझा करते हैं।
इस तरह दीपावली से जुड़ी अलग-अलग पौराणिक कथाएं हमें सत्य, धर्म, अच्छाई और समृद्धि के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं।


