मुंबई, । अभिनेत्री लिसा रे ने अपनी जिंदगी के एक ऐसे पहलू पर बात की है, जिससे कई लोग खुद को जोड़ पाएंगे। लिसा ने बताया कि सालों तक अलग-अलग शहरों, देशों और महाद्वीपों में रहने के बाद उनके लिए ‘घर’ का मतलब पूरी तरह बदल गया है। कभी जिस घर को इंसान एक स्थायी ठिकाना मानता है, लिसा के लिए वह एहसास अब किसी एक पते या चार दीवारों से जुड़ा नहीं है। उनके मुताबिक, घर वह जगह है, जहां इंसान बिना किसी डर या झिझक के खुद जैसा रह सके। इस एहसास में उनकी बेटियों की मौजूदगी भी उनके लिए बेहद खास है।
लिसा रे ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर घर, अपनापन और सुरक्षित महसूस करने को लेकर अपनी सोच साझा की। उन्होंने लिखा, ”पूरी जिंदगी लोगों ने मुझे यह समझाया कि इंसान के पास एक स्थायी ठिकाना होना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि एक जगह से जुड़कर रहने से जिंदगी में स्थिरता आती है और इंसान को एक आधार मिलता है। लेकिन मेरा अनुभव इससे बिल्कुल अलग रहा है। मैंने महज 16 साल की उम्र से सफर करना शुरू कर दिया था। समय के साथ मुझे घूमने और अलग-अलग जगहों को करीब से महसूस करने की आदत हो गई।”
उन्होंने कहा, ”मैं सिर्फ दुनिया को तस्वीरों में कैद करने के बजाय उसे अनुभव करना पसंद करती हूं। अलग-अलग जगहों पर जाना, वहां के माहौल को समझना और कुछ समय के लिए उस जगह का हिस्सा बन जाना मेरी जिंदगी का हिस्सा रहा है। शायद यही वजह है कि दुनिया के इतने हिस्से देखने के बावजूद मेरे पास यात्राओं की ज्यादा तस्वीरें नहीं हैं। मैंने ऐसी कई जगहों पर जिंदगी बिताई, जो पहली नजर में ही घर जैसी लगीं। इसके उलट कुछ ऐसे घर भी रहे, जहां रहने के बावजूद मुझे हमेशा लगा कि वह जगह अस्थायी है। अलग-अलग देशों और महाद्वीपों में रहते हुए मैंने अपने जीवन के कई रूप देखे और खुद में भी कई बदलाव महसूस किए।”
लिसा ने कहा, “किसी जगह से जुड़ाव का सीधा संबंध इस बात से नहीं है कि वहां आपका सामान या फर्नीचर रखा हुआ है। मेरे लिए घर की असली परिभाषा वह जगह है, जहां सबसे ज्यादा सहज महसूस हो। ऐसी जगह, जहां मुझे यह सोचने की जरूरत नहीं पड़े कि मैं क्या कहूं, कैसे व्यवहार करूं या सामने वाले को अपने बारे में क्या समझाऊं। घर मेरे लिए ऐसी जगह या ऐसा व्यक्ति हो सकता है, जो मेरे व्यक्तित्व के हर बदलते और विकसित होते रूप को खुले दिल से स्वीकार करे।”
लिसा ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ”इतने सालों तक लगातार जगह बदलने के बाद अब मेरे लिए सुरक्षित महसूस करना ही असली लग्जरी बन गया है। आज के समय में घर का मतलब कई अलग-अलग चीजें हो सकता है। कभी कोई इंसान घर जैसा लग सकता है, तो कभी किसी अनजान शहर की जानी-पहचानी सड़क। कभी खाना पकने की खुशबू घर जैसा एहसास दे सकती है और कभी बिस्तर के पास रखी किताब भी वही सुकून दे सकती है।”
अपने पोस्ट में लिसा ने अपनी बेटियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ”मेरी बेटियां जब मेरे पास होती हैं, तो वह एहसास भी मेरे लिए घर जैसा होता है। जिंदगी के वे खास पल, जब मेरे भीतर का शोर अचानक शांत हो जाता है और मुझे लगता है कि दुनिया बिल्कुल उसी जगह है, जहां उसे होना चाहिए, मेरे लिए घर की तरह हैं।”
लिसा ने बताया कि जब उनसे पूछा जाता है कि वह कहां से हैं, तो इस सवाल का जवाब उनके लिए आसान नहीं होता। उन्होंने कहा, “मैं कई जगहों से बनी हूं, और मेरी जिंदगी पर उससे भी ज्यादा जगहों का असर रहा है। हालांकि, आज गोवा मुझे अपना घर महसूस होता है। ऐसा इसलिए नहीं है कि मैंने घूमना या जगहें बदलना बंद कर दिया है, बल्कि इसलिए कि गोवा में मुझे पहली बार ऐसा महसूस होता है कि मुझे हर वक्त आगे बढ़ते रहने की जरूरत नहीं है।”

