नई दिल्ली। भारत की रक्षा ताकत को नई मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। चेन्नई की जुप्पा जिओ नेविगेशन टेक्नोलॉजी ने पिछले तीन महीनों में भारतीय सेना को 500 से ज्यादा ‘अजीत’ सीरीज के हाई-टेक ड्रोन सौंपे हैं। ये ड्रोन सेना की फ्रंटलाइन यूनिट्स के लिए तैयार किए गए हैं और दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रखने, रियल टाइम जानकारी जुटाने और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
‘अजीत’ ड्रोन छोटे, हल्के और पोर्टेबल हैं, जिन्हें सैनिक आसानी से अपने साथ ले जा सकते हैं। कुछ ड्रोन इतने कॉम्पैक्ट हैं कि बैकपैक में भी रखे जा सकते हैं। इनमें दिन और रात दोनों समय काम करने वाले कैमरे लगे हैं, जिससे हर परिस्थिति में निगरानी संभव है। बड़े मॉडल करीब एक घंटे तक उड़ान भर सकते हैं और कई किलोमीटर तक की दूरी कवर कर सकते हैं।
इन ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इनकी साइबर सुरक्षा है। आधुनिक युद्ध में ड्रोन हैकिंग, सिग्नल जैमिंग और गलत सिग्नल देकर सिस्टम को भ्रमित करने का खतरा बढ़ गया है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इन्हें तैयार किया गया है। इनमें ‘नवगति’ नाम का ऑटो पायलट सिस्टम लगा है, जो बिना GPS के भी काम कर सकता है। यानी जहां सिग्नल उपलब्ध नहीं होते या इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर की स्थिति होती है, वहां भी ये ड्रोन अपना मिशन पूरा करने में सक्षम हैं।
सेना के जवानों को इन ड्रोन के संचालन और रखरखाव की ट्रेनिंग भी दी गई है। साथ ही एक साथ कई ड्रोन उड़ाने यानी स्वॉर्म ऑपरेशन की भी ट्रेनिंग दी गई है, जिससे बड़े इलाके की निगरानी और ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। ये ड्रोन STQC से प्रमाणित हैं और सुरक्षा व गुणवत्ता के सभी मानकों पर खरे उतरे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पहले भारत विदेशी और खासकर चीनी ड्रोन सिस्टम पर निर्भर था, लेकिन अब स्वदेशी तकनीक के जरिए देश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ‘अजीत’ सीरीज के ड्रोन इसी बदलाव का बड़ा उदाहरण हैं, जो भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध के लिए और अधिक सक्षम बना रहे हैं।

