Parenting Tips: बच्चों का बात न मानना, बार-बार समझाने के बाद भी अपनी जिद पर अड़े रहना और घर में सामान फैलाना कई माता-पिता के लिए परेशानी का कारण बन जाता है। ऐसी स्थिति में अक्सर माता-पिता अपना आपा खो बैठते हैं और बच्चों पर चिल्लाने लगते हैं। हालांकि, डर की वजह से बच्चा कुछ समय के लिए बात मान सकता है, लेकिन इससे वह आपकी बात को सही तरीके से समझेगा, यह जरूरी नहीं है। बेहतर पेरेंटिंग के लिए धैर्य रखना, बच्चों की भावनाओं को समझना और उनके अच्छे व्यवहार को प्रोत्साहित करना जरूरी है। आइए जानते हैं बच्चों को बिना डांटे अपनी बात समझाने के कुछ आसान तरीके।
1. पहले समझें कि बच्चा बात क्यों नहीं मान रहा
हर बार बच्चे का बात न मानना उसकी शरारत या जानबूझकर परेशान करने की कोशिश नहीं होती। कई बार बच्चा खेल में व्यस्त होता है या उसे यह समझने में समय लगता है कि माता-पिता उससे क्या चाहते हैं। ऐसे में अचानक चिल्लाने के बजाय उसे पहले से बता दें कि खेलने का समय खत्म होने वाला है। इससे बच्चे को अपना काम रोकने और अगले काम के लिए तैयार होने का समय मिलेगा।
2. बच्चे पर बार-बार चिल्लाने से बचें
बच्चे की गलती पर गुस्सा आना स्वाभाविक है, लेकिन हर बार चिल्लाना समस्या का सही समाधान नहीं है। इससे बच्चा डरकर बात मान सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह अपनी गलती भी समझे। इसलिए शांत आवाज में बच्चे को बताएं कि उसका व्यवहार गलत क्यों है और उससे क्या अपेक्षा की जा रही है। इससे वह धीरे-धीरे अपने व्यवहार और उसके परिणामों को समझना सीख सकता है।
3. अच्छे व्यवहार के लिए बच्चे की तारीफ करें
अगर बच्चा अपने खिलौने समेटता है, सामान सही जगह रखता है या आपकी बात सुनकर कोई काम करता है, तो उसकी तारीफ जरूर करें। उदाहरण के लिए, आप कह सकते हैं, “आज तुमने अपने खिलौने खुद समेटे, मुझे बहुत अच्छा लगा।” इस तरह की सच्ची और स्पष्ट तारीफ बच्चे को अच्छा व्यवहार दोहराने के लिए प्रोत्साहित कर सकती है।
4. अपनी बात छोटे और स्पष्ट शब्दों में कहें
छोटे बच्चों को एक साथ कई निर्देश देने से वे उलझ सकते हैं। इसलिए उन्हें एक बार में एक ही बात साफ शब्दों में समझाएं। जैसे, “अपने खिलौने डिब्बे में रख दो।” निर्देश जितना स्पष्ट और आसान होगा, बच्चे के लिए उसे समझना और पूरा करना उतना ही आसान हो सकता है।
5. बच्चे को बदलाव के लिए समय दें
बच्चों की आदतें एक दिन में नहीं बदलतीं। अगर बच्चा आज आपकी बात मानता है और अगले दिन फिर वही गलती करता है, तो निराश होने के बजाय धैर्य बनाए रखें। घर के नियम स्पष्ट रखें, उन्हें लगातार समझाएं और खुद भी उनका पालन करें। माता-पिता का व्यवहार बच्चों के सीखने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
बच्चे की भावनाओं को समझना भी है जरूरी
पेरेंटिंग का मतलब केवल बच्चे से अपनी बात मनवाना नहीं, बल्कि उसे सही और गलत के बीच अंतर समझने में मदद करना भी है। बच्चे की बात सुनें, उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें और गलती होने पर उसे सुधारने का मौका दें।
यदि बच्चा लगातार बहुत अधिक गुस्सा करता है, निर्देश समझने में परेशानी महसूस करता है या उसका व्यवहार घर, स्कूल और रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या बाल मनोवैज्ञानिक से सलाह लेना बेहतर हो सकता है। धैर्य, स्पष्ट नियम और सकारात्मक व्यवहार के जरिए बच्चों को बेहतर आदतें सीखने में मदद मिल सकती है।


