Kanya Pujan Vidhi 2026: शारदीय नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि पर भक्त छोटी कन्याओं को माता दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनका पूजन करते हैं। इस दौरान कन्याओं को भोजन कराया जाता है और उन्हें उपहार व दक्षिणा देकर सम्मानपूर्वक विदा किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विधि-विधान से कन्या पूजन करने से माता रानी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
अगर आप भी इस नवरात्रि कन्या पूजन करने जा रहे हैं, तो जान लीजिए कि यह अनुष्ठान किस दिन किया जा सकता है, इसके लिए कौन-सी सामग्री चाहिए और पूजा की सही विधि क्या है।
कन्या पूजन 2026: जानें तारीख और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष कन्या पूजन के लिए 18 और 19 अक्टूबर का दिन बताया गया है। अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार अष्टमी या नवमी तिथि पर यह अनुष्ठान किया जा सकता है।
- 18 अक्टूबर 2026: अष्टमी पर कन्या पूजन करने वाले परिवार इस दिन पूजा कर सकते हैं।
- 19 अक्टूबर 2026: अष्टमी और नवमी के संयोग को ध्यान में रखते हुए इस दिन भी कन्या पूजन किया जा सकता है। नवमी पर पूजन करने वाले परिवार इसी दिन अनुष्ठान कर सकते हैं।
- शुभ समय: सुबह 6 बजे से 10 बजे तक का समय कन्या पूजन के लिए शुभ बताया गया है।
पूजा का समय तय करने से पहले अपने क्षेत्र के पंचांग में तिथि और मुहूर्त की पुष्टि अवश्य कर लें। परिवार में जिस दिन कन्या पूजन करने की परंपरा हो, उसी के अनुसार अनुष्ठान करना उचित है।
कन्या पूजन के लिए जरूरी सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एक जगह रख लें, ताकि अनुष्ठान के दौरान किसी चीज की कमी न हो।
- साफ जल और पैर पोंछने के लिए तौलिया
- कन्याओं और बालक को बैठाने के लिए आसन
- रोली या कुमकुम और अक्षत
- कलावा या रक्षा सूत्र
- कन्याओं के लिए लाल चुनरी
- धूप, दीपक और आरती की सामग्री
- हलवा, पूरी और काले चने
- फल और अन्य सात्विक प्रसाद
- उपहार, दक्षिणा और विदाई के लिए आवश्यक सामग्री
कन्या पूजन की स्टेप-बाय-स्टेप विधि
1. कन्याओं को आमंत्रित करें: अष्टमी या नवमी के दिन 2 से 10 वर्ष तक की कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाएं। परंपरा के अनुसार एक छोटे बालक को भी आमंत्रित किया जाता है, जिसे बटुक भैरव का प्रतीक माना जाता है।
2. चरण धोकर आसन पर बिठाएं: घर आई कन्याओं और बालक के पैर स्वच्छ जल से धोएं। इसके बाद उन्हें साफ आसन पर सम्मानपूर्वक बैठाएं।
3. तिलक और रक्षा सूत्र लगाएं: सभी के माथे पर रोली या कुमकुम और अक्षत से तिलक करें। इसके बाद परंपरा के अनुसार उनकी कलाई पर कलावा बांधें।
4. चुनरी अर्पित करें: कन्याओं को श्रद्धापूर्वक लाल चुनरी ओढ़ाएं। यह माता रानी के प्रति सम्मान और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
5. आरती करें: धूप-दीप जलाकर कन्याओं और बालक की आरती उतारें। इस दौरान माता दुर्गा का स्मरण करें और सुख-समृद्धि की कामना करें।
6. हलवा-पूरी और चने का भोग परोसें: सभी को पारंपरिक प्रसाद के रूप में हलवा, पूरी और काले चने खिलाएं। चाहें तो सात्विक आलू या कद्दू की सब्जी भी बना सकते हैं।
7. उपहार और दक्षिणा दें: भोजन के बाद कन्याओं को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार उपहार व दक्षिणा दें।
8. आशीर्वाद लेकर विदा करें: अंत में कन्याओं और बालक का सम्मान करें, उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें और श्रद्धापूर्वक विदा करें।
ध्यान रखें कि पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, सम्मान और कन्याओं के प्रति अच्छा व्यवहार है। कन्याओं की संख्या पूरी न हो पाने पर भी उपलब्ध कन्याओं का पूरे आदर के साथ पूजन किया जा सकता है।
कन्या पूजन में क्या बनाएं भोग?
कन्या पूजन के दौरान हलवा, पूरी और सूखे काले चने का भोग विशेष रूप से प्रचलित है। कई परिवारों में इसके साथ आलू या कद्दू की सात्विक सब्जी भी बनाई जाती है। भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई और शुद्धता का ध्यान रखें।
कन्या पूजन में कन्याओं को क्या गिफ्ट दें?
कन्याओं को विदाई के समय उनकी उम्र और जरूरत के अनुसार उपहार दिए जा सकते हैं। इसके लिए आप ये विकल्प चुन सकते हैं:
- लाल चुनरी या चूड़ियां
- कॉपी, पेंसिल और कलर बॉक्स
- फल और मिठाई
- छोटे खिलौने
- अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा
उपहार देना अनिवार्य नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार छोटी-सी भेंट देकर भी कन्याओं का सम्मान किया जा सकता है।
धार्मिक मान्यता: नवरात्रि में कन्या पूजन को देवी दुर्गा के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। अष्टमी हो या नवमी, पूजा में स्वच्छता, श्रद्धा और कन्याओं के सम्मान का विशेष ध्यान रखें।


