भोपाल : मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में कैबिनेट की विशेष बैठक आयोजित की गई। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर चलाए जा रहे सेवा संकल्प अभियान के तहत हुई। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किए गए विकास कार्यों और उपलब्धियों पर चर्चा की गई तथा इस संबंध में एक संकल्प पारित किया गया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि प्रदेश में दो दिन बाद डीपीसी (जिला पदोन्नति समिति) की बैठक होगी।
सीएम मोहन यादव ने गिनाईं पीएम मोदी की उपलब्धियां
कैबिनेट की बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर और उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने जितनी बार विधायक का चुनाव लड़ा, उतनी ही बार मुख्यमंत्री बने। इसी तरह सांसद के रूप में चुनाव जीतने के बाद वे प्रधानमंत्री बने।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय भाजपा को लेकर यह धारणा थी कि पार्टी अपने दम पर देश में पूर्ण बहुमत की सरकार नहीं बना सकती। हालांकि, वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने पूर्ण बहुमत हासिल कर केंद्र में सरकार बनाई। उन्होंने इस उपलब्धि को देश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में प्रस्तुत किया।
मध्यप्रदेश में धार्मिक पर्यटन को मिला बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में भी विकास के कई महत्वपूर्ण कार्य हुए हैं। उन्होंने उज्जैन के श्री महाकाल महालोक का उदाहरण देते हुए बताया कि इसके विकास से धार्मिक पर्यटन को नई गति मिली है।
सीएम के अनुसार, पहले उज्जैन में प्रतिवर्ष लगभग 60 से 70 लाख श्रद्धालु आते थे, जबकि पिछली बार यह संख्या करीब 13 करोड़ तक पहुंचने की बात कही गई। उन्होंने आगामी अवधि में श्रद्धालुओं की संख्या 20 करोड़ तक पहुंचने की संभावना भी जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सुविधाओं, विकास कार्यों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण से प्रदेश में धार्मिक पर्यटन का विस्तार हुआ है।
नदी जोड़ो परियोजनाओं से मध्यप्रदेश को मिली नई संभावनाएं
सीएम मोहन यादव ने केंद्र सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश में आगे बढ़ रही प्रमुख नदी जोड़ो परियोजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना, पार्वती-कालीसिंध-चंबल नदी जोड़ो परियोजना और तापी बेसिन से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में जल प्रबंधन और विकास की संभावनाओं को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
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नक्सलवाद से मुक्ति और ‘चीता स्टेट’ के रूप में पहचान
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आए बदलाव का जिक्र करते हुए प्रदेश के नक्सलमुक्त होने को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने बालाघाट जिले के सूपखार और आसपास के वन क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले इन इलाकों में जाना जोखिम भरा माना जाता था, लेकिन अब परिस्थितियों में बदलाव आया है।
इसके साथ ही उन्होंने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री के अनुसार, चीतों की मौजूदगी और संरक्षण प्रयासों के चलते प्रदेश ने ‘चीता स्टेट’ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है।
बैठक के बाद मीडिया ब्रीफिंग में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हुए विकास कार्यों और मध्यप्रदेश में चल रही प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख किया। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश में डीपीसी की बैठक दो दिन बाद आयोजित होगी।


