Close Menu
Localnews11.comLocalnews11.com
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश दुनियां
    • मध्यप्रदेश
  • खेल
  • अन्य
    • अपराध / हादसा
    • राजनीति
    • सेहत, खानपान, और जीवनशैली
    • धर्म
  • मनोरंजन
  • व्यापार
What's Hot

दुनियाभर में बढ़ेगा भारत की टेक्नोलॉजी का दबदबा! PM मोदी ने बताया विकसित भारत का रोडमैप

28/10/2026

करम परब में CM विष्णु देव साय की बड़ी घोषणा, उरांव समाज को मिलेगा 50 लाख का सामुदायिक भवन

28/10/2026

परिवार के साथ समय बिताना सबसे खास… दीपिका पादुकोण दो बेटियों संग मनाएंगी दिवाली

28/10/2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Localnews11.comLocalnews11.com
Facebook X (Twitter) Instagram
Wednesday, October 28
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • देश दुनियां
    • मध्यप्रदेश
  • खेल
  • अन्य
    • अपराध / हादसा
    • राजनीति
    • सेहत, खानपान, और जीवनशैली
    • धर्म
  • मनोरंजन
  • व्यापार
Localnews11.comLocalnews11.com
Home»छत्तीसगढ़»धान के खेतों में दोहरी मुसीबतः आर्सेनिक और कैडमियम एक साथ, इनसे कैसे निपटें किसान
    छत्तीसगढ़

    धान के खेतों में दोहरी मुसीबतः आर्सेनिक और कैडमियम एक साथ, इनसे कैसे निपटें किसान

    News DeskBy News Desk27/10/2026
    Share Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Copy Link WhatsApp

        शुचिता नैयर एवं दीपक शर्मा

          अनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़

          छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और चावल यहाँ के प्रमुख भोजन में शामिल है। खेत की मिट्टी और सिंचाई के पानी से आर्सेनिक (As) और कैडमियम (Cd) धान के दाने तक पहुँच सकते हैं। दोनों धातुओं का न रंग, न गंध और न स्वाद होता है। लंबे समय तक इनका सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। छत्तीसगढ़ में आर्सेनिक की समस्या अंबागढ़ चौकी और कांकेर के कुछ क्षेत्रों में, जबकि कैडमियम का जोखिम कोरबा सहित औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में सामने आया है। खास बात यह है कि दोनों धातुएँ एक ही खेत में साथ हो सकती हैं।

          इन धातुओं का स्रोत क्या है?

          आर्सेनिक प्राकृतिक चट्टानों, आर्सेनिकयुक्त भूजल, पुराने कीटनाशकों, खदान के मलबे और कोयले की राख से आ सकता है। खेती में सिंचाई इसका प्रमुख माध्यम है। कैडमियम जिंक अयस्क, रॉक फॉस्फेट उर्वरक, फ्लाई ऐश, औद्योगिक अपशिष्ट और खदान के मलबे से खेत में पहुँच सकता है।

          तालिका 1. आर्सेनिक और कैडमियम एक नजर में

          कहाँ से आता है

          रोज़ मर कि उपयोग

          धान जिस रूप में सोखता है

          जड़ में घुसने का दरवाज़ा

          कौन-सीमिट्टीकीदशाग्रहणबढ़ाती है

          पौधे को मुख्य नुकसान

          मनुष्य को मुख्य नुकसान

          सुरक्षित सीमाएँ

          आर्सेनिक (As)

          सल्फाइडचट्टानें, आर्सेनिकयुक्तभूजल, पुरानेकीटनाशक, खदानकामलबा,

          कोयलेकीराख

          लकड़ीपरिरक्षक, काँच, मिश्रधातु,

          रंगद्रव्य, चमड़ाकमाना, गोला-बारूद आर्सेनाइट, जोखेतमेंपानीभरनेपरछूटताहै

          सिलिकॉनकारास्ता

          जलमग्न, ऑक्सीजन-रहित

          जड़ की बढ़त रुकना, क्लोरोफिलघटना,

          दाना कम भरना

          फेफड़े और मूत्राशयकाकैंसर

          पीने के पानी में 0.01 मि.ग्रा./ली. (WHO); पॉलिशचावलमें 0.2 मि.ग्रा./कि.ग्रा.

          अकार्बनिक As (कोडेक्स)

          कैडमियम (Cd)

          जिंक अयस्क, रॉक-फॉस्फेटउर्वरक, खदानकामलबा, फ्लाईऐश, सीवेजकीचड़

          Ni-Cd बैटरी, रंगद्रव्य, लेप, मिश्रधातु,

          सौरपैनल

          कैडमियम आयन,

          जो खेत सूखने पर छूटता है

          मैंगनीज़, लोहा औरज़िंककेवाहक

          सूखी, हवादार, अम्लीय

          पीलापन, बौनापन, DNA क्षति

          त्वचाकेघाव,

          त्वचा,

          गुर्देकीक्षति, भंगुरहड्डियाँ

          पीनेकेपानीमें 0.003 मि.ग्रा./ली. (WHO); पॉलिशचावलमें 0.4 मि.ग्रा./कि.ग्रा. (कोडेक्स)

          छत्तीसगढ़ में आर्सेनिक और कैडमियमकी स्थिति

          छत्तीसगढ़ में अभी दोनों धातुओं का पूर्ण विकासखंडवार नक्शा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अध्ययनों से जोखिम वाले क्षेत्र स्पष्ट हुए हैं। अंबागढ़ चौकी के 10 गाँवों में हैडपंप के पानी में आर्सेनिक 0.03-0.75 मिलीग्राम प्रति लीटर और औसतन 0.32 मिला। 13 गाँवों की मिट्टी में यह 0.9-5.7 तथा कौडीकसा में 7.5 मिलीग्राम प्रति किलोग्राम तक पाया गया। कांकेर के 89 स्थानों के भूजल में औसत आर्सेनिक 0.144 मिलीग्राम प्रति लीटर मिला, जोWHOसीमा का लगभग 14 गुना है। कोरबा के औद्योगिक क्षेत्रों और बिलासपुर के राजमार्ग किनार खेतों में कैडमियम व अन्य धातुओं का प्रदूषण भी सामने आया है।

          तालिका 2. छत्तीसगढ़ में मापे गए आर्सेनिक और कैडमियम

          स्थान अंबागढ़चौकी, राजनांदगाँव

          क्या नमूना लिया गया नलकूप औ रकुएँ

          अंबागढ़‌चौकी (10 गाँव)

          हैंडपंप औरसिंचाईकापा नी

          अंबागढ़‌चौकी (13 गाँव)

          ऊपरीमिट्टी, 0 से 20 से.मी.

          अंबागढ़चौकी स्थल) (24

          चावल, गेहूँ, मक्काकादाना, भूसी, पैरा, जड़

          क्या मिला

          WHO सीमासेकहीं ऊपरकेसमूहः स्रोतभूगर्भीय, डोंगरगढ़पट्टी के ग्रेनाइटमें आर्सेनिकखनि ज

          हैंडपंप 0.03 से 0.75 मि.ग्रा./ली. औसत 0.32: सिंचाईनलकूप 0.08 से 0.49

          0.9 से 5.7 मि.ग्रा. As/कि.ग्रा.: 50 कौडीकसा 7.5

          दाने, भूसीऔरपैरेमें As, Pb और Cd अनुमेयसीमासेऊपर; IR-64 मेंसबसे अधिक, लुचई औरसरनामें सबसेकम

          | सुरक्षितसीमा

          0.01 मि.ग्रा./ली. (WHO)

          अध्ययन शुक्लावअन्य 2010

          कुमार व अन्य 2018

          पीने के लिए 0.01; सिंचाईकेलिए 0.10

          सिंघल, 2024

          मि.ग्रा./कि.ग्रा. (FAO)

          वाखलेव अन्य 2025

          चावलमें 0.2 As और 0.4 Cd मि.ग्रा./कि.ग्रा. (कोडेक्स)

          कांकेर ज़िला

          भूजल (89 स्थान), मिट्टी, पौधे, जलीयजीव

          आर्सेनिक औसत 0.144 मि.ग्रा./ली. 0.01 WHO सीमाका 14 गुनाः पूरापारितंत्रप्रदूषित

          पांडेयवअन्य, 2006

          कोरबाकोयलापट्टी

          मिट्टी औरतलछट

          बहुत अधिक Cr, Mn, Cu, Zn, Pb; फ्लाईऐशबाँधोंकपासहॉटस्पॉट; कोयला, फ्लाईऐशऔरडीज़लकीछाप

          मि.ग्रा./ली. (WHO) प्रदूषणसूचको क

          दासवअन्य, 2018

          कोरबा औद्योगिकखेत

          ऊपरीमिट्टी, टमाटर, बैंगन कृषिमिट्टी

          Cd, As, Pb और Cr मौजूद: स्रोतखदानमलबा, फ्लाईऐश, खदानधूल Cd 0.13 से 0.33 मि.ग्रा./कि.ग्रा. 20 (सीमाकेभीतर); As 5.5 से 19.6;

          WHO/FAO मिट्टीसीमाएँ मि.ग्रा. As/कि.ग्रा.

          चौहानवअन्य , 2026 पांडेयवअन्य 2026

          बिलासपुर, राजमार्गकिनारे के खेत

          रायपुरशहर और आसपा

          ऊपरीमिट्टी

          स

          आधेसे अधिकस्थलमध्यमप्रदूषित Cr. Mn और Pb पृष्ठभूमिसेऊपरः कैडमियमकीरिपोर्टनहीं

          (EU) भारतीय और

          राजकवअन्य

          2022

          EU मिट्टीमानक

          मानव स्वास्थ्य पर आर्सेनिक और कैडमियम के दुष्प्रभाव

           

          आर्सेनिक लंबे समय तक शरीर में जाने पर त्वचा में बदलाव तथा त्वचा, फेफड़े और मूत्राशय के कैंसर से जुड़ा है। कैडमियम गुर्दों को नुकसान पहुँचा सकता है और हड्डियों

          को कमजोर कर सकता है। प्रदूषित धान का पैरा पशुओं के माध्यम से भी भोजन-श्रृंखला में धातुओं को पहुँचा सकता है।

          चित्र 1. आर्सेनिक और कैडमियम के दीर्घकालिक संपर्क का मानव शरीर पर असर। बाएँ: हथेलियों पर काले धब्बे और कठोर चकत्ते (केराटोसिस), पीने के पानी से आर्सेनिक विषाक्तता का क्लासिक संकेत। दाएँ: दोनों धातुओं से प्रभावित अंग और रोग।

          धान में दोनों धातुएँ एक साथ हों तो क्या होता है

          IGKV और BARC के अध्ययन के अनुसार आर्सेनिक और कैडमियम का संयुक्त प्रभाव केवल दोनों प्रभावों का जोड़ नहीं है। मध्यम और लगभग समान मात्रा में दोनों का कुछ प्रभाव एक-दूसरे को कम कर सकता है, लेकिन अधिक या असंतुलित मात्रा में नुकसान बढ़ सकता है। इसलिए दोनों धातुओं की एक साथ जाँच और प्रबंधन जरूरी हैं।

          1. अपने खेत को जानिएः मिट्टी, सिंचाई के पानी और चभ् की जाँच कराएँ। एक धातु अधिक मिले तो दूसरी की भी जाँच करें। आर्सेनिक प्रभावित क्षेत्र, कोयला पट्टी, औद्योगिक क्षेत्र और व्यस्त सड़कों के आसपास जाँच को प्राथमिकता दें।

           

          2. स्रोत रोकिएः नलकूप के पानी में आर्सेनिक 0.10 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक हो तो ग्रीष्मकालीन धान में इसका उपयोग कम करें। संभव हो तो तालाब या नहर का पानी लें। कम-कैडमियम वाले उर्वरक चुनें और फ्लाई ऐश व औद्योगिक अपशिष्ट को खेत में जाने से रोकें।

           

          3. पानी को दोनों के लिए साधिएः आर्सेनिक पानी भरे खेत में, जबकि कैडमियम लंबे समय तक खेत सूखने पर अधिक उपलब्ध हो सकता है। इसलिए बाली बनने से पहले नियंत्रित गीला-सूखा प्रबंधन करें और बाद में मिट्टी में पर्याप्त नमी रखें।

           

          4. मिट्टी में बाँधिएः चूना कैडमियम की उपलब्धता घटा सकता है। चूना और आयरन ऑक्साइड के प्रयोग से आर्सेनिक लगभग 64 प्रतिशत और कैडमियम 35 प्रतिशत तक कम होने की रिपोर्ट है। संशोधित बायोचार, वर्मीकम्पोस्ट और सिलिकॉन स्रोत भी उपयोगी हो सकते हैं।

           

          5. सही किस्म चुनिएः धान की किस्मों में धातु संचय की क्षमता अलग-अलग होती है। मुक्तोश्री (IET21845) कम आर्सेनिक संचय वाली किस्म है। अंबागढ़ चौकी में लुचई और सरना ने IR-64 की तुलना में कम विषैले तत्व जमा किए। स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार KVK से किस्म की सलाह लें।

           

          6. छिड़काव से पौधे को बचाइएः दाना भरने के समय कुछ पर्णीय छिड़काव धातुओं का दाने तक पहुँचना कम कर सकते हैं। परीक्षणों में सेलेनियम और काइटोसान आधारित उपचारों से लाभ मिला है। इनका प्रयोग विशेषज्ञKVKकी सलाह से ही करें।

           

          7. सबसे खराब जमीन और पैरे का भोजन-शृंखला से बाहर कीजिएः अत्यधिक प्रदूषित खेतों में कुछ मौसम गैर-खाद्य या सफाई वाली फसलें ली जा सकती हैं। Pteris vittataजैसे पौधे आर्सेनिक का अधिक संचय करते हैं। प्रदूषित पैरा पशुओं को न खिलाएँ और खेत में न जलाएँ।

           

          8. रसोई मेंः चावल को अच्छी तरह धोकर अधिक पानी में पकाएँ और अतिरिक्त पानी निकाल दें। इससे आर्सेनिक कम हो सकता है। संदिग्ध क्षेत्र का पानी पीने और भोजन पकाने में उपयोग न करें।

          तालिका 3. धान के दाने में आर्सेनिक और कैडमियम के विरुद्ध खेत का उपाय-संदूक

          उपाय मिट्टी, पानीऔर pH कीजाँच, दोनों सिंचाईस्रोतबदलना

          किसके विरुद्ध

          परीक्षणोंमेंक्यामिला

          सावधानी

          पानी का स्रोत बदलने परदोबारा जाँचक राएँ

          बालीसेपहलेबारी-बारीगीला-सूखा, दोनों बादमेनममिट्टी

          अंबागढ़ चौकी में तालाबकेपानीमें नलकूपकाएक-तिहाई आर्सेनिकधा

          बालीसेपकनेतकमिट्टीनमरखें

          चूना और आयरन ऑक्साइड

          दोनों

          AWD औरवर्मीकम्पोस्टरोदानेका As एक-तिहाई, उपजएक-चौथाई अधिक; लंबासुखाना Cd बढ़ाताहै

          अकेलेचूनेसेदानेका Cd 70 से 80 चुनाव आयरन ऑक्साइडसे As 64 और Cd 35 प्रतिशतकम प्रतिशतकमः

          अकेलाचूना आर्सेनिककेलिएकुछनहीं करता

          संशोधितबायोचार

          लोहा-यासिलिकॉन- दोनों

           

          Cd बाँधने और नछोड़नेकेलिएबना

          As सादाबायोचार आर्सेनिक बढ़ा सकता है

           

          ज़िंक औरलोहेसेसमृद्धवर्मीकम्पोस्ट

           

          आर्सेनिक

           

          दानेका As 58 प्रतिशतकम, उपजमेंकमीनहीं, चारवर्षकेपरीक्षण

           

          कम्पोस्ट के सूखेवज़नके लगभगदसवें हिस्सेतकसमृद्धकरें

           

          सिलिकॉन:

           

          भूसीकीराख,

           

          आर्सेनिक,

           

          कैल्शियमसिलिकेट, स्लेग

           

          आर्सेनाइट केलिएकमदरवाज़ेखु

           

          कमकैडमियमवालाफॉस्फेट उर्वरक

           

          कुछकैडमियम कैडमियम

           

          ले; Si Cd ग्रहणभीदबाताहै खेतकेनिवेशसे

           

          भारीमात्रामैडालना पड़ताहै

           

          कम-ग्रहणकिस्म (मुक्तोश्री, लुचई, सरना: Cd-सुरक्षितकिस्में)

           

          आर्सेनिकयाके डमियम

           

          कामुख्यस्रोतहटताहे

           

          Cd फॉस्फोरसज़रूरतसेज्यादानडालें

           

          टोसानकाछिड़काव दानाभरावके समयसेलेनियमयाकाइ

           

          दोनों; ROS सुरक्षाबढ़ाता है

           

          IR-64 किस्मोंकेबीचकईगुना अंतरः अंबागढ़चौकी में मॅसबसे अधिक संचय

           

          सेबचें KVK सेपूछे; हॉटस्पॉटमें IR-64

           

          दोनोंधातुओंकेलिए Se Si मात्रामायने रखती है; प्रकाशितदरोंकापालनकरें

           

          सबसे खराबखेतों में सफाईफसलयागैर दोनों -खाद्यफसल

           

          सेबेहतर, काइटोसानछिड़कावसेदानेका As 35 से 61 प्रतिशतकम Pteris

           

          vittata धीमा; कईमौसम फर्नआर्सेनिककाअति-संचयकरती है

           

          दोनों

           

          पैराचारेकी श्रृंखलासेबाहर; खेतमेंनजलाएँ

           

          जोदाने में नहीं जाता वह पैरेमेंरहता पैरेकीखादबनाएँयानिपटानकरें

           

          पैरेका आर्सेनिकदूधका आसीने कबढ़ाता है

           

          छत्तीसगढ़ में अब धान की मिट्टी, सिंचाई के पानी और अनाज में आर्सेनिक व कैडमियम का विकासखंडवार नक्शा तैयार करना जरूरी है। साथ ही कम-संचय वाली किस्मों और दोनों धातुओं को एक साथ नियंत्रित करने वाली तकनीकों पर काम करना होगा।

           

          सारांश

           

          आर्सेनिक ओर कैडमियम एक ही धान के खेत में साथ पहुँच सकते हैं। इसलिए केवल एक धातु पर आधारित उपाय पर्याप्त नहीं हैं। मिट्टी पानी की जाँच, सुरक्षित सिंचाई, संतुलित जल प्रबंधन, उचित मृदा सुधारक, कम-संचय वाली किस्में, विशेषज्ञ की सलाह और प्रदूषित पैरे को पशु आहार स दूर रखनाकृइन सभी उपायों को अपनाकर ही किसान, उपभोक्ता, पशुधन और पर्यावरण की सुरक्षा बेहतर ढंग से की जा सकती है।

           

          पत्राचार हेतु लेखकः शुचिता नैयर, ईमेलः [email protected]

          News Desk
              Share. Facebook Twitter WhatsApp Copy Link

              Related Posts

              छत्तीसगढ़

              करम परब में CM विष्णु देव साय की बड़ी घोषणा, उरांव समाज को मिलेगा 50 लाख का सामुदायिक भवन

              28/10/2026
              छत्तीसगढ़

              ऑल इंडिया IPSC शूटिंग चैंपियनशिप में राजकुमार कॉलेज रायपुर का दबदबा

              27/10/2026
              छत्तीसगढ़

              ई-चालान से परेशान वाहन चालकों को राहत! रायपुर में नियुक्त हुए शिकायत निवारण अधिकारी, अब ऐसे करें आपत्ति दर्ज

              27/10/2026
              छत्तीसगढ़

              CG Teacher News: शिक्षकों की छुट्टी के नियमों में बदलाव, ऑफलाइन आवेदन पर रोक; अब ऐसे मिलेगी मंजूरी

              26/10/2026
              छत्तीसगढ़

              प्रतिदिन राजधानी के स्थानीय संपादक जतीन नचरानी “छत्तीसगढ़ गौरव” अवार्ड से सम्मानित

              25/10/2026
              छत्तीसगढ़

              छत्तीसगढ़ में ट्रेन से सफर करने वालों के लिए अलर्ट: 21 दिनों तक मेमू ट्रेन के परिचालन में बदलाव, जानें पूरी जानकारी

              25/10/2026
              Add A Comment
              Leave A Reply Cancel Reply

              Top Posts

              मुख्य सचिव की अध्यक्षता में रायपुर में आईटीएमएस के सुचारू संचालन को लेकर बैठक सम्पन्न हुई

              10/09/20264 Views

              जल संरक्षण और हर घर तक स्वच्छ पेयजल हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

              10/09/20264 Views

              Karwa Chauth Chura Design: करवाचौथ पर चाहिए स्टाइलिश लुक? चूड़ा सेट के इन 5 लेटेस्ट डिजाइन्स पर डालें नजर

              15/10/20263 Views

              LPG Gas Subsidy: खाते में नहीं आए 210 रुपये? घर बैठे ऐसे चेक करें सब्सिडी का स्टेटस, जानें पैसे अटकने की वजह

              12/10/20263 Views
              Don't Miss

              दुनियाभर में बढ़ेगा भारत की टेक्नोलॉजी का दबदबा! PM मोदी ने बताया विकसित भारत का रोडमैप

              By News Desk28/10/20260

              नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत को भविष्य की तकनीकों को…

              करम परब में CM विष्णु देव साय की बड़ी घोषणा, उरांव समाज को मिलेगा 50 लाख का सामुदायिक भवन

              28/10/2026

              परिवार के साथ समय बिताना सबसे खास… दीपिका पादुकोण दो बेटियों संग मनाएंगी दिवाली

              28/10/2026

              ऑल इंडिया IPSC शूटिंग चैंपियनशिप में राजकुमार कॉलेज रायपुर का दबदबा

              27/10/2026
              Stay In Touch
              • Facebook
              • Twitter
              • Pinterest
              • Instagram
              Contact Us
              Contact Us

              Address : Raipur, Chhattisgarh 492001
              Mobile : +91-8871339995

              Email : [email protected]

              Facebook YouTube WhatsApp
              Important Pages
              • Home
              • Privacy Policy
              • About Us
              • Contact Us
              • Disclaimer
              • Terms & Conditions
              Post Calendar
              October 2026
              MTWTFSS
               1234
              567891011
              12131415161718
              19202122232425
              262728293031 
              « Sep    
              © 2026 LOCAL NEWS 11. Designed by Nimble Technology.

              Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.